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नशा नाश का दूजा नाम

नशा नाश का दूजा नाम।
घर की बर्बादी है इसका काम।।
नशे से अपनें बच्चों को बचाना।
तुम उन्हें प्यार से समझा कर होश में लाना।। इससे जग में तो होगी ही जग हंसाई।
अपनी रही सही इज्जत भी समझो तुम ने गंवाई।।
नशे की आदत से बचो दुनिया वालों।
अभी भी वक्त है संभल जाओ जहां वालों।।
नहीं तो तमाम उम्र भर पछताओगे।
अपनी रही सही इज्जत भी खाक में मिलाओगे।।
नशे की बुरी आदत से बचो युवा पीढ़ी।
वर्ना तुम कभी ना चढ़ पाओगे तरक्की की सीढ़ी।।
नशा करके तुम कभी भी आगे न बढ़ पाओगे।
अपने मां बाप को भी इस नर्क की आग में झुलसाओगे।।
नशा चाहे कैसा भी हो बुरा है दोस्तों।
यह तो है काली अंधकार की परत दोस्तों।।
नशा करके ना तो तुम खुश रह पाओगे।
ना अपने परिवार को दुःखी ही देख पाओगे।।
ऐसा कोई भी काम ना हो जो तुम ना कर पाओगे।
नशा तो एक छोटी सी चीज है इसको भी हंसते-हंसते छोड़ पाओगे।।

अपने मां बाप के सम्मान को न तुम दाव पर लगाना।
उनकी उम्मीदों पे खराब उतर के दिखाना।।
एक बार इससे छुटकारा पा जाओगे तो।
अपने मां-बाप की आंखों में खुशी की झलक देख पाओगे।।
वह भी तुम्हें खुशी से गले लगाएंगे
तुम्हारी इस भूल को माफ कर पाएंगे।

लग्न से करो पढाई

चुन्नू  मुन्नू, आज तुम खड़े क्यों हो उदास?

मत हिचकिचाओ  कह दो खुलकर बिंदास। पुस्तक हाथ में लेकर करो पढ़ाई।

मत करो आपस में हाथापाई।

मन में विश्वास और उमंग जगाकर लग्न से करो पढ़ाई।

तभी तो माता-पिता और गुरु जन सभी करेंगे तुम्हारी बढ़ाई।

तुम कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते जाओगे।

जो अभी तक ना कर पाए वह भी तुम कर पाओगे।

सारे विश्व में अपना नाम कमाओ गे।

चारों ओर से वाह!वाह! हासिल करते जाओगे दृढ निश्चय का संकल्प लेकर अपनी उड़ान भरोगे ।

तभी तो तुम हंसते-हंसते अपनी मंजिल पाओगे।

चोर सिपाही

बिहार के एक छोटे से गांव में  जुम्मन एक रेडी चालक के रूप में काम करता था। वह मेहनत से जो कुछ भी कमा कर लाता उससे वह अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था। उसने अपने बेटे लाखन को भी स्कूल में डाल दिया था। लाखन बहुत ही समझदार बच्चा था।

जब वह किसी भी  सिपाही को आते हुए देखता था तो उसका मन भी करता था कि उसके पास भी सिपाही की जैसी वेशभूसा होती।  वह भी सिपाही बनना चाहता था। अपने पापा को कहता था मैं बड़ा होकर सिपाही बनूंगा। उसके पापा भी खुश होकर उसे कहते थे ठीक है बेटा इसके लिए खूब मेहनत लगाकर पढ़ना चाहिए। उसकी मां उसे समझाती कि बेटा सिपाही बनने के लिए खूब मेहनत करनी पड़ती है। उन जैसे अच्छे अच्छे काम करने पड़ते हैं, इसके लिए पढ़ना बहुत ही जरूरी होता है। वह अपनी पढ़ाई खूब मन लगाकर करता। उसके माता-पिता ने उसे घर के समीप ही एक गवर्नमेंट स्कूल में दाखिल करवा दिया था। वह आठवीं कक्षा में पढ़ता था। स्कूल में इसका एक दोस्त था। उसका नाम था कर्ण। उसको अपने मन की सारी बातें बता दिया करता था। वह दोनों दोस्त लम्बे चौड़े थे। उन दोस्तों नें एक दूसरे से वायदा किया कि हम  जरुरत पड़ने पर  एक दूसरे की मदद अवश्य करेंगे। हम दोनों आज एक दूसरे से वायदा करते हैं। हम अपनें परिवार वालों को अपनी दोस्ती के बीच आने नहीं देगें।

 

कर्ण के माता पिता भी कुछ दूरी पर ही रहते थे। वह एक मध्यम परिवार का बच्चा था। उसके पास सब कुछ सुविधाएं थी जो कुछ एक इंसान के लिए चाहिए। उसके पिता एक फैक्ट्री में काम करते थे और माता भी प्राइवेट ऑफिस में कर्मचारी थी। लाखन उससे हर रोज मिलने आता था परंतु वह उसके घर नहीं जाता था। वह बाहर ही उसे बुलाकर उसके साथ काफी दूर तक घूमने निकल जाता था।  वहां पर दोनों मिल जुलकर एक दूसरे से सारी बातें कहते थे। दोनों की दोस्ती बहुत ही मजबूत थी। कर्ण अपने दोस्त को कहता था कि मैं बड़ा होकर पुलिस इंस्पेक्टर बनना चाहता हूं। मेरे मां-बाप मुझे कहते हैं कि ठीक है जो तुम करना चाहते हो वह अवश्य करो। इसी तरह दिन खुशी खुशी गुजर रहे थे। कर्ण के माता पिता उसे कहते थे कि बेटा दोस्ती तो अपने जैसे इंसानों के साथ ही करनी चाहिए। कर्ण इस मामले में बिल्कुल अलग था। वह कहता मुझे कुछ फर्क नहीं पड़ता। आप की सोच मुझ से मेल नहीं खाती।

तुमनें एक गरीब रेडी चालक के बेटे को अपना दोस्त बनाया है। उस से किनारा कर लो।  कर्ण कहता कि नहीं वही तो मेरा सबसे सच्चा दोस्त है। आप अगर उसे अपने घर नहीं बुलाना चाहते तो ना सही मैं उससे बाहर ही मिल लिया करूंगा लेकिन मैं अपने दोस्त के साथ किया हुआ वादा कभी नहीं तोड़ूंगा।

पुलिस इंस्पेक्टर भी तो देश की सेवा करता है। उसका कर्तव्य होता है किसी गुनाह करने वाले व्यक्ति को सजा देना। मेरा दोस्त भी बहुत ही होशियार है। वह भी एक सिपाही बनना चाहता है। कर्ण के माता-पिता उसे समझाते मगर वह कभी भी नहीं मानता था। वह। कहता था कि मैं अपने दोस्त को मिलने जरूर जाऊंगा इसके लिए वह हर घड़ी तैयार रहता था। चाहे बारिश हो या गर्मी, चाहे आंधी हो या तूफान दोनों दोस्त एक दूसरे के साथ इकट्ठे मिलते और काफी देर तक गप्पे हांका करते।

लाखन घर में अकेला था। कभी कभी वह घर में बिना बताए चीजें उठा लेता था। उसकी मां को इस बात का आभास उस वक्त हुआ जब वह एक दिन अपनें दोस्त का पैन उठा कर ले आया। उसकी मां बोली हमें किसी की भी कोई वस्तु बगैर उसकी इजाजत के कभी नहीं उठानी चाहिए। तुम नें उस से पैन पूछ के लिया था वह बोला नहीं उसकी जेब से निकाल लिया। उसकी जेब में दो पैन थे। मुझे आज मैडम नें स्कूल में  पैन न लाने के लिए सारा दिन खड़ा रखा। शाम को घर आते वक्त मैं चुपके से उसकी जेब से वह उड़ा लिया। लाखन की  मां बोली बेटा एक तरफ तो तुम सिपाही बनने की बात करते हो। दूसरी तरफ चोरी करते हो। सिपाही का कर्तव्य भी देश की रक्षा करना होता है। आज से तुम यह बात गांठ में बांध लो  कभी किसी की चोरी मत करो। तभी तुम एक अच्छे सिपाही बन सकते हो।

 

वह बोला मां मेरा  स्कूल में एक दोस्त और भी है उस नें मुझे यह सब सिखाया। कई बार मैंनें पापा की जेब से भी दस दस के नोट कितनी बार निकाले हैं। उन्हें पता ही नहीं चला। उसकी मां बोली तुम को तो लोग सिपाही नहीं चोर पुकारा करेंगे। वह बोला मां मैं अब समझ गया हूं मैं अब कभी भी चोरी नहीं करुंगा।  उसकी मां बोली तुम उसका पैन लौटा कर उस से माफी मांग लेना।

स्कूल में आज बहुत चहल पहल थी। सारे बच्चे बालदिवस मनाने के लिए एकत्रित हुए थे। मैडम ने कहा जो बच्चा  कुछ भी बोलना चाहेगा आज वह कुछ भी बोल  सकता है मगर वह जो बोले यह विचार उसके अपनें  होनें चाहिए। जो बच्चा अच्छा बोलेगा उसे हम अपनी तरफ से कुछ न कुछ उपहार में अवश्य देंगें। लाखन के दिमाग में अपनी मां  के शब्द हथौड़े के समान गूंज रहे थे। वह एक सिपाही नहीं चोर बनेगा। वह कभी भी गलत काम नहीं करेगा। आज मैडम को भी बता देगा कि उसने राहुल की जेब से कल पैन ले कर अपनी पैन्ट की जेब में भर लिया था। उसके  दोस्त को तो मालूम भी नहीं होगा कि उसका पैन मैंनें चुराया था। आज वह अपने किए पर शर्मिन्दा है।

स्कूल में बाल सभा के लिए जब सब बच्चे एकत्रित हुए लाखन उठ कर खड़ा हो कर बोला आज वह कुछ विचार प्रस्तुत करना चाहता है आज से पहले उसने इस बात की ओर कभी ध्यान ही नहीं दिया था। सारे अध्यापक उसे ही देख रहे थे वह कभी भी बोलने के लिए कभी खड़ा नहीं हुआ था। वह बोला मेरे प्यारे सहपाठियों और मेरे गुरुजनों आप को मेरा हार्दिक अभिनन्दन। आप के सामने इस तरह आने के लिए क्षमा चाहता हूं। आज वह खुल कर अपनें विचार आप के सामने रखेगा।

लाखन बोला मेरे पिता रेडी चला चला कर हमारा पेट भरते हैं। मेरी मां मेरी एक सच्ची गुरु ही नहीं मेरी एक हमदर्द भी है। वह उसे हर कदम कदम पर अच्छी अच्छी सलाह दिया करती है। वह हर वक्त अपनी मां को कहता है कि मैं बड़ा हो कर एक सच्चा सिपाही बनना चाहता हूं। उसकी मां नें हमेशा सिखाया एक सच्चा सिपाही बनने के लिए एक कर्तव्य निष्ठ व्यक्ति बनना जरुरी होता है। ईमानदारी से अपना काम करना दृढ संकल्प और प्रतिभाशाली जैसे गुण होने चाहिए तभी तुम अपनें मकसद में सफल हो जाओगे। वह तो आज पूरी तरह से असफल हो गया। वह तो चोरी करनें लगा था। कल उसने अपनें दोस्त की जेब से चुपके से पैन निकाल लिया। उसके दोस्त राहुल को पता ही नहीं चला। यह चोरी करनें की आदत उसे उसके स्कूल में पढने वाले सहपाठी से ही पड़ी। वह आज सबके सामने उस विद्यार्थी का नाम नहीं लेगा। वह भी जल्दी ही चोरी करनें की आदत को छोड़ देगा। उसकी गारन्टी वह खुद लेता है। कृपया उसकी एक भूल को आप माफ कर देना नही तो वह अपनें आप को कभी भी ऊंचा नहीं उठा सकता। उसने सभी अभिभावकों के सामने अपनी भूल का प्रायश्चित किया। राहुल को सारा किस्सा सुनाया कल जब उसके पास कक्षा में पैन नहीं था तो उसे बैन्च पर खड़ा होनें की सजा मिली थी। शाम को जाते वक्त राहुल की जेब से पैन निकाल कर अपनें बस्ते में डाल दिया। उस पैन को पेन्ट कर दिया ताकि वह अपनें पैन को पहचान न पाए।

घर पहुंच कर जब काफी देर तक उस पैन को ले कर पेन्ट कर रहा था। मेरी मां कमरे के अन्दर  आ कर बोली बहुत रात हो चुकी है। तुम इस वक्त क्या कर रहे हो? मां को देखते ही उसने वह पैन बिस्तर के नीचे छिपा दिया ताकि मां की नजर उस पर न पड़े। वह बोली बेटा दाल में तो कुछ काला जरुर है। सच्च सच्च बताओ। सिपाही बनने के लिए हर बात साफ साफ स्पष्ट होनी चाहिए। वह डर रहा था। मां को क्या बताए। वह। आईस्ता से बोला कुछ भी तो नहीं मुझे नींद ही नहीं आ रही थी। उसने जानबूझ कर अपनी रजाई नीचे  तक फैला दी थी जिससे उसकी मां को जरा भी शक न हो। वह बोली रजाई को तो ठीक कर लेते। जाते जाते उसकी मां नें रजाई ऊपर की ओर की उसकी मां की नजर ब्रश पर पड़ी। इस पेंन्ट से तुम क्या कर रहे थे? और इस पैन में यह पेन्ट क्यों किया? तुमने यह पेन्ट का डिब्बा अपनें पापा से लिया। वह बोला नहीं मां अपनें आप उठा कर लाया। उसकी मां बोली बेटा यह तो चोरी हुई। मैनें तुम्हे बताया था कि किसी की भी कोई वस्तु नहीं उठाते। अपनें पापा से पुछा कर ले लेते तो वे भी कभी तुम्हे मना नहीं करते। लाखन रो कर बोला मां उसने आज बहुत ही गलत काम किया है। उसने सारी बात अपनी मां को बता दी। उसकी मां बोली कल तुम उस बच्चे का पैन वापिस कर के आओगे तो मैं समझूंगा कि तुम एक दिन बहुत बड़े सिपाही बनोगे। अभी कुछ भी नहीं बिगड़ा है। तुम सुधर सकते हो।अध्यापक उस बच्चे की बात से प्रभावित हुए। उन्होंने उसे माफ भी कर दिया और उसकी प्रशंसा भी की और कहा तुम अवश्य ही एक दिन बहुत बड़े सिपाही बनोगे। इन्सान तो गलतियों का पुतला। है। जो गिर कर संभल जाए उसकी हमेंशा जीत होती है। राहुल नें भी उसे माफ कर दिया। अध्यापकों नें उसे पैन का डिब्बा ईनाम में दिया। उस दिन के बाद उसने कभी भी चोरी नहीं की।

होनी को कुछ और ही मंजूर था  एक बार उनके गांव में भयंकर बाढ़ आई और जिससे  आसपास के क्षेत्रों में बहुत ही भयानक तबाही हुई।  इतनी भयंकर बाढ़ आई थी  किसी का भी कुछ नहीं बचा। घोषणा कर दी गई कि सभी लोग  यहां से  दूसरे क्षेत्र में चले जाएं  जब तक हालात नहीं सुधरते। जैसे तैसे करके उनका परिवार तो बच गया  मगर अब उनके पास खाने के लिए अनाज का एक भी दाना नहीं  बचा था । उनका सब कुछ बाढ़ में नष्ट हो गया था।

लाखन के पिता के पास ले देकर एक  रेडी ही बची थी।   उन्होंने    फिर भी हौसला नहीं हारा एक दूसरे को तसल्ली दी। सारे परिवार को समझाया।  होनी को कौन टाल सकता है? हमें इस मुसीबत की घड़ी में एक दूसरे का साथ देना चाहिए। शुक्र है कि हमारा परिवार बच गया इससे ज्यादा हमें और कुछ नहीं चाहिए। हमारी  बुढापे की लाठी तो हमारे साथ है। खुशी मनाओ कि हमारे बेटे को कुछ नहीं हुआ  नहीं तो अनर्थ हो जाता। लाखन के पिता कहते कि मैं रेढी चला कर कुछ कमा कर ले ले आया करूंगा पहले हालात तो ठीक हो जाएं। इस बार  बाढ ने चारों ओर तबाही ही तबाही ला दी थी। बहुत से लोग बाढ़ की चपेट में आ गए थे। किसी का कुछ भी नहीं बचा था। जिस किसी के पास जो कुछ बचा था वह बहुत ही कम था। कुछ दिनों के लिए  उन्हें किसी पास के क्षेत्र में उन्हें भेज दिया गया था कर्ण का परिवार भी बच गया था लेकिन उसके मां-बाप बहुत ही दुःखी थे अब क्या करें?। वह रो-रोकर एक दूसरे को अपना हालात बयान कर रहे थे। लाखन नें अपने दोस्त कर्ण को गले से लगा लिया और कहा कि दोस्त हम तो जिंदा है हम अपने मां-बाप को संभालेंगे हम एक दूसरे की मदद अवश्य करेंगे हम अपने मां-बाप को दुख नहीं देंगे। थोड़े दिनों बाद स्थिति कुछ सुधरी।

 

लोंगो के  रहने के लिए तंबू गाड़ दिए गए थे। लोग उसमें रहने के लिए चले गए थे। लखन के माता पिता तो रेडी चला कर अपना पेट भर रहे थे मगर कर्ण के माता पिता बहुत ही दुखी नजर आ रहे थे। उन्होंने तो कभी भी मेहनत-मजदूरी नहीं की थी। लाखन अपने पिता से बोला कि पिताजी हम हमें इनकी मदद भी करनी चाहिए। उनका हौंसला बढ़ाना चाहिए। जो कुछ लाते उसमें से वह कर्ण के माता पिता को भी दे देते। कर्ण के माता पिता को भी महसूस हुआ कि हमने इस बच्चे के साथ बहुत ही अन्याय किया। हमने इस को अपने घर में नहीं आने दिया। हम अपने बड़ा होने पर मान किया करते थे। इस बच्चे ने सिखा दिया कि इस दुनिया में कोई भी छोटा और बड़ा नहीं है दुनिया में सभी एक जैसे हैं। वह धीरे-धीरे वह भी मेहनत करने लग गए थे।

 

एक दिन कर्ण और लाखन ने सोचा कि अब हम भी कमा कर लाया करेंगे जिससे हमारे घर का खर्चा भी निकल सकेगा। बाढ़ आ जाने के कारण चारों ओर चोरों का आतंक छाया हुआ है। चोर चुपके से आकर लोगों का  सामान तंबुओं में से निकाल कर ले जाते थे। जिससे आसपास के लोग बड़े दुःखी थे। कुछेक लोग तो ताकतवर थे परंतु कुछ एक लोग ऐसे थे जो कि उन चोरों का मुकाबला नहीं कर सकते थे। वह काफी लाचार थे जितना कमाते थे उतना ही चोर उनका सामान लूटकर ले जाते थे। फरियाद करें तो किसके पास।

एक दिन लाखन ने कर्ण को कहा कि हमें ही कुछ करना होगा वर्ना गांव के लोग यूं ही लड़ लड़ कर मर जाएंगे। उन दोनों ने एक योजना बनाई अबकी बार जब लुटेरे चोरी करने के लिए  जब तंम्बुओं में घुसेंगे तो  हम उन पर कड़ी नजर रखेंगे। उनको उन्हीं की ही भाषा में जवाब देना होगा। एक दिन जब लुटेरे उस तंबू में चोरी करने के लिए आए लाखन ने उन्हें आते हुए देख लिया। लाखन नें  सिपाही की वेशभूषा पहनी हुई थी। उसने लुटेरों को कहा कि तुम यहां पर क्या लेने आए हो? मैं एक सिपाही हूं अगर मैं तुम्हारी शिकायत  पुलिस वालों से कर दूं तो तुम तो पकड़े जाओगे। आज मैंने तुम्हें रंगे हाथों पकड़ लिया है। अभी जाकर मैं सब कुछ सच-सच पुलिस इंस्पेक्टर को बताता हूं। पुलिस इंस्पेक्टर मेरा दोस्त है। लुटेरे बोले तुम्हारे जैसे झूठ बोलने वाले हमने  बहुत देखें हैं। तुम झूठ भी बड़ी होशियारी से बोल लेते हो। पहले  तुम हमें अपने सिपाही पुलिस इंस्पेक्टर से मिलवाओ   तब हम जानेंगे कि तुम ठीक कह रहे हो या गलत। वह बोला तो ठीक है। कल तुम्हें मैं दूर से उन से मिलवा दूंगा और तुम्हें सजा भी दिलवा दूंगा।

लुटेरे डर गए बोले हम चोरी नहीं करेंगे। परंतु तुम हमें कल पहले पुलिस इंस्पेक्टर से मिलवाना। हम दूर से देखेंगे। यह कहकर लुटेरे वापस चले गए।

दूसरे दिन लाखन ने अपने दोस्त कर्ण को कहा कि तुम पुलिस इंस्पेक्टर बन कर आ जाना औरतुम्हें मैं इशारा करूंगा तुम समझ जाना कि मेरे आस-पास लुटेरे हैं। तुम उनके पास आकर कहना तुम कहां से आए हो? मैंने पहले तुम्हें यहां कभी नहीं देखा। मैं उन्हें बचाने की कोशिश करूंगा तब तुम मेरे कहने पर उन्हें छोड़ देना। हम बाद में उन गुंडों को अवश्य ही पकड़ लेंगे और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा देंगे। दूसरे दिन लाखन उन लुटेरों के पास आकर बोला यह पुलिस इंस्पेक्टर तो बहुत ही सख्त है।  तुम  अगर उनके पल्ले पड़ गए  वह तुम्हें छोड़ेगा नहीं। तुमने क्या-क्या मार चोरी किया है? तुम उसे मेरे घर में छुपा दो। हो सकता है वह तुम्हारे घर में तलाशी ले। वह लुटेरे बोले यह कभी नहीं हो सकता। तुम झूठ कहते हो। लाखन बोला आज यहां पर  पुलिस इंस्पेक्टर आने ही वाला है। आज खुद ही देखते हैं। पुलिस इंस्पेक्टर जैसे ही आया लाखन ने उसे इशारा कर दिया था। लाखन उन उन गुंडों के साथ ही था।  लाखन नें पुलिस इन्सपैक्टर से हाथ मिलाया।

लाखन  ने उन लुटेरों को पुलिस इंस्पेक्टर के साथ  मिलाया।पुलिस इन्स्पैेक्टर बोला यह व्यक्ति कहां से आए हैं? यह तो नए लगते हैं। तुम कहां रहते हो? जल्दी से हमें बताओ यहां पर कुछ लुटेरों का बोलबाला हो गया है इसलिए हमें चारों तरफ तलाशी लेनी पड़ेगी। तुम जल्दी से अपने घर का पता बताओ। लुटेरे डर के मारे कांपनें लगे। वह बोले हमारा घर यहां से काफी दूर है। कल हम तुम्हें अपने घर ले जाएंगे। यह हमारे घर का पता है। उन्होंने एक कॉपी पर  अपने घर का पता नोट कर दिया।

पुलिस इन्सपैक्टर बोला आज तो तुम्हें  अपनें दोस्त के कहनें पर छोड़ दिया। लाखन बोला यह लुटेरे नहीं है। पुलिस इन्सपैक्टर  बोला  तुम्हारे कहने पर मैं इन्हें छोड़ रहा हूं। मगर कल मैं इनके घर अवश्य आऊंगा।

लाखन को तो सब पहले से ही मालूम था कि लुटेरों ने चोरी किया हुआ माल अपने घर में रखा हुआ था। लाखन इन लुटेरों से बोला मुझे पता है तुम ने इन लोगों का चोरी किया हुआ माल अपने पास रखा है। तुम उस सामान को मेरे घर पर रख दो। तुम्हारा माल भी सुरक्षित रहेगा और तुम भी पकड़े नहीं जाओगे। लुटेरों को उसकी बात पसंद आ गई। लुटेरों ने सारा का सारा लूटा हुआ माल लाखन के घर पर रख दिया।

वादे के मुताबिक पुलिस इंस्पेक्टर दूसरे दिन लुटेरों से मिलने गया। वहां पर कुछ भी उसे हासिल नहीं हुआ। लाखन ने उसे पहले ही बता दिया था कि  उसनें चोरी किया हुआ माल अपने घर में रखा है।

पुलिस इंस्पेक्टर लाखन  से बोला कहीं तुम भी तो इसके साथ   नहीं मिले हुए हो। तुम्हारे घर पर भी तलाशी लेनी पड़ेगी। चलो, चल कर देखते हैं। तुम मेरे दोस्त हो तो क्या हुआ? इंस्पेक्टर का फर्ज होता है कि चोरी करने वाले का पर्दाफाश करें।  पुलिस इंस्पेक्टर कर्ण लाखन के घर पर आते हैं। वहां पर छानबीन करते हैं। लुटेरे भी उसके साथ उसके घर पर आते हैं।

अचानक कर्ण की नजर उन गठरियों पर पड़ती है। पुलिस इंस्पेक्टर कहते हैं कि इन गठरियों में क्या है? खोलो खोल कर बताओ। उन गठरीओं में सभी लोगों का लूटा हुआ माल था पुलिस इंस्पेक्टर लाखन से बोले अब तुम्हें मेरे हाथ से कोई नहीं बचा सकता। तुमने चोरी की है।  पुलिस इन्सपैक्टर  लाखन के घर पर छापा डाल कर चोरी किया माल बरामद करतें हैं। । लाखन कहता है कि मैंने चोरी नहीं की। यह मेरे साथ लुटेरे हैं। यह माल इन्हीं का लूटा हुआ माल है। उन्होंने चोरी करके मेरे घर पर यह माल रख दिया। लुटेरे कहने लगे यह झूठ कहता है। यह हमारा माल नहीं है। यह तो इसी ने चोरी किया होगा। लुटेरे वहां से भाग गए। लुटेरे जैसे ही भाग रहे थे कर्ण और लखन ने दोनों ने असली पुलिस इंस्पेक्टर को फोन कर दिया था। हमारे क्षेत्र में कुछ लुटेरों ने आतंक मचाया हुआ था। हमने उन्हें पकड़ लिया है। पुलिस इंस्पेक्टर और सिपाही बनकर उन लुटेरों का सफाया किया और उन्हें पकड़ लिया है। आप जल्दी से आकर उन लुटेरों को पकड़ लीजिए। वह अभी ज्यादा दूर नहीं गए हैं। पुलिस इंस्पेक्टर ने उन्हें  बता दिया था कि यहां पर इन चोरों की गाड़ी खड़ी है। पुलिस स्पेक्टर ने समय पर पहुंचकर उन लुटेरों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। कर्ण और लाखन के इस प्रकार सेवाभाव को देखकर कहने लगे तुम अवश्य ही सिपाही और पुलिस इंस्पेक्टर बनने लायक हो। आज से तुम्हारी पढ़ाई का और सारा खर्चा हम करेंगे। तुम दोनों ही अपने मकसद में जरूर कामयाब होंगे। लोंगों को उनका चोरी किया गया माल वापस मिल गया था सब लोग उनकी प्रशंसा करना नही थकते थे। बिहार के एक छोटे से गांव में  जुम्मन एक रेडी चालक के रूप में काम करता था। वह मेहनत से जो कुछ भी कमा कर लाता उससे वह अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था। उसने अपने बेटे लाखन को भी स्कूल में डाल दिया था। लाखन बहुत ही समझदार बच्चा था।

जब वह किसी भी  सिपाही को आते हुए देखता था तो उसका मन भी करता था कि उसके पास भी सिपाही की जैसी वेशभूसा होती।  वह भी सिपाही बनना चाहता था। अपने पापा को कहता था मैं बड़ा होकर सिपाही बनूंगा। उसके पापा भी खुश होकर उसे कहते थे ठीक है बेटा इसके लिए खूब मेहनत लगाकर पढ़ना चाहिए। उसकी मां उसे समझाती कि बेटा सिपाही बनने के लिए खूब मेहनत करनी पड़ती है। उन जैसे अच्छे अच्छे काम करने पड़ते हैं, इसके लिए पढ़ना बहुत ही जरूरी होता है। वह अपनी पढ़ाई खूब मन लगाकर करता। उसके माता-पिता ने उसे घर के समीप ही एक गवर्नमेंट स्कूल में दाखिल करवा दिया था। वह आठवीं कक्षा में पढ़ता था। स्कूल में इसका एक दोस्त था। उसका नाम था कर्ण। उसको अपने मन की सारी बातें बता दिया करता था। वह दोनों दोस्त लम्बे चौड़े थे। उन दोस्तों नें एक दूसरे से वायदा किया कि हम  जरुरत पड़ने पर  एक दूसरे की मदद अवश्य करेंगे। हम दोनों आज एक दूसरे से वायदा करते हैं। हम अपनें परिवार वालों को अपनी दोस्ती के बीच आने नहीं देगें।

 

कर्ण के माता पिता भी कुछ दूरी पर ही रहते थे। वह एक मध्यम परिवार का बच्चा था। उसके पास सब कुछ सुविधाएं थी जो कुछ एक इंसान के लिए चाहिए। उसके पिता एक फैक्ट्री में काम करते थे और माता भी प्राइवेट ऑफिस में कर्मचारी थी। लाखन उससे हर रोज मिलने आता था परंतु वह उसके घर नहीं जाता था। वह बाहर ही उसे बुलाकर उसके साथ काफी दूर तक घूमने निकल जाता था।  वहां पर दोनों मिल जुलकर एक दूसरे से सारी बातें कहते थे। दोनों की दोस्ती बहुत ही मजबूत थी। कर्ण अपने दोस्त को कहता था कि मैं बड़ा होकर पुलिस इंस्पेक्टर बनना चाहता हूं। मेरे मां-बाप मुझे कहते हैं कि ठीक है जो तुम करना चाहते हो वह अवश्य करो। इसी तरह दिन खुशी खुशी गुजर रहे थे। कर्ण के माता पिता उसे कहते थे कि बेटा दोस्ती तो अपने जैसे इंसानों के साथ ही करनी चाहिए। कर्ण इस मामले में बिल्कुल अलग था। वह कहता मुझे कुछ फर्क नहीं पड़ता। आप की सोच मुझ से मेल नहीं खाती।

तुमनें एक गरीब रेडी चालक के बेटे को अपना दोस्त बनाया है। उस से किनारा कर लो।  कर्ण कहता कि नहीं वही तो मेरा सबसे सच्चा दोस्त है। आप अगर उसे अपने घर नहीं बुलाना चाहते तो ना सही मैं उससे बाहर ही मिल लिया करूंगा लेकिन मैं अपने दोस्त के साथ किया हुआ वादा कभी नहीं तोड़ूंगा।

पुलिस इंस्पेक्टर भी तो देश की सेवा करता है। उसका कर्तव्य होता है किसी गुनाह करने वाले व्यक्ति को सजा देना। मेरा दोस्त भी बहुत ही होशियार है। वह भी एक सिपाही बनना चाहता है। कर्ण के माता-पिता उसे समझाते मगर वह कभी भी नहीं मानता था। वह। कहता था कि मैं अपने दोस्त को मिलने जरूर जाऊंगा इसके लिए वह हर घड़ी तैयार रहता था। चाहे बारिश हो या गर्मी, चाहे आंधी हो या तूफान दोनों दोस्त एक दूसरे के साथ इकट्ठे मिलते और काफी देर तक गप्पे हांका करते।

लाखन घर में अकेला था। कभी कभी वह घर में बिना बताए चीजें उठा लेता था। उसकी मां को इस बात का आभास उस वक्त हुआ जब वह एक दिन अपनें दोस्त का पैन उठा कर ले आया। उसकी मां बोली हमें किसी की भी कोई वस्तु बगैर उसकी इजाजत के कभी नहीं उठानी चाहिए। तुम नें उस से पैन पूछ के लिया था वह बोला नहीं उसकी जेब से निकाल लिया। उसकी जेब में दो पैन थे। मुझे आज मैडम नें स्कूल में  पैन न लाने के लिए सारा दिन खड़ा रखा। शाम को घर आते वक्त मैं चुपके से उसकी जेब से वह उड़ा लिया। लाखन की  मां बोली बेटा एक तरफ तो तुम सिपाही बनने की बात करते हो। दूसरी तरफ चोरी करते हो। सिपाही का कर्तव्य भी देश की रक्षा करना होता है। आज से तुम यह बात गांठ में बांध लो  कभी किसी की चोरी मत करो। तभी तुम एक अच्छे सिपाही बन सकते हो।

 

वह बोला मां मेरा  स्कूल में एक दोस्त और भी है उस नें मुझे यह सब सिखाया। कई बार मैंनें पापा की जेब से भी दस दस के नोट कितनी बार निकाले हैं। उन्हें पता ही नहीं चला। उसकी मां बोली तुम को तो लोग सिपाही नहीं चोर पुकारा करेंगे। वह बोला मां मैं अब समझ गया हूं मैं अब कभी भी चोरी नहीं करुंगा।  उसकी मां बोली तुम उसका पैन लौटा कर उस से माफी मांग लेना।

स्कूल में आज बहुत चहल पहल थी। सारे बच्चे बालदिवस मनाने के लिए एकत्रित हुए थे। मैडम ने कहा जो बच्चा  कुछ भी बोलना चाहेगा आज वह कुछ भी बोल  सकता है मगर वह जो बोले यह विचार उसके अपनें  होनें चाहिए। जो बच्चा अच्छा बोलेगा उसे हम अपनी तरफ से कुछ न कुछ उपहार में अवश्य देंगें। लाखन के दिमाग में अपनी मां  के शब्द हथौड़े के समान गूंज रहे थे। वह एक सिपाही नहीं चोर बनेगा। वह कभी भी गलत काम नहीं करेगा। आज मैडम को भी बता देगा कि उसने राहुल की जेब से कल पैन ले कर अपनी पैन्ट की जेब में भर लिया था। उसके  दोस्त को तो मालूम भी नहीं होगा कि उसका पैन मैंनें चुराया था। आज वह अपने किए पर शर्मिन्दा है।

स्कूल में बाल सभा के लिए जब सब बच्चे एकत्रित हुए लाखन उठ कर खड़ा हो कर बोला आज वह कुछ विचार प्रस्तुत करना चाहता है आज से पहले उसने इस बात की ओर कभी ध्यान ही नहीं दिया था। सारे अध्यापक उसे ही देख रहे थे वह कभी भी बोलने के लिए कभी खड़ा नहीं हुआ था। वह बोला मेरे प्यारे सहपाठियों और मेरे गुरुजनों आप को मेरा हार्दिक अभिनन्दन। आप के सामने इस तरह आने के लिए क्षमा चाहता हूं। आज वह खुल कर अपनें विचार आप के सामने रखेगा।

लाखन बोला मेरे पिता रेडी चला चला कर हमारा पेट भरते हैं। मेरी मां मेरी एक सच्ची गुरु ही नहीं मेरी एक हमदर्द भी है। वह उसे हर कदम कदम पर अच्छी अच्छी सलाह दिया करती है। वह हर वक्त अपनी मां को कहता है कि मैं बड़ा हो कर एक सच्चा सिपाही बनना चाहता हूं। उसकी मां नें हमेशा सिखाया एक सच्चा सिपाही बनने के लिए एक कर्तव्य निष्ठ व्यक्ति बनना जरुरी होता है। ईमानदारी से अपना काम करना दृढ संकल्प और प्रतिभाशाली जैसे गुण होने चाहिए तभी तुम अपनें मकसद में सफल हो जाओगे। वह तो आज पूरी तरह से असफल हो गया। वह तो चोरी करनें लगा था। कल उसने अपनें दोस्त की जेब से चुपके से पैन निकाल लिया। उसके दोस्त राहुल को पता ही नहीं चला। यह चोरी करनें की आदत उसे उसके स्कूल में पढने वाले सहपाठी से ही पड़ी। वह आज सबके सामने उस विद्यार्थी का नाम नहीं लेगा। वह भी जल्दी ही चोरी करनें की आदत को छोड़ देगा। उसकी गारन्टी वह खुद लेता है। कृपया उसकी एक भूल को आप माफ कर देना नही तो वह अपनें आप को कभी भी ऊंचा नहीं उठा सकता। उसने सभी अभिभावकों के सामने अपनी भूल का प्रायश्चित किया। राहुल को सारा किस्सा सुनाया कल जब उसके पास कक्षा में पैन नहीं था तो उसे बैन्च पर खड़ा होनें की सजा मिली थी। शाम को जाते वक्त राहुल की जेब से पैन निकाल कर अपनें बस्ते में डाल दिया। उस पैन को पेन्ट कर दिया ताकि वह अपनें पैन को पहचान न पाए।

घर पहुंच कर जब काफी देर तक उस पैन को ले कर पेन्ट कर रहा था। मेरी मां कमरे के अन्दर  आ कर बोली बहुत रात हो चुकी है। तुम इस वक्त क्या कर रहे हो? मां को देखते ही उसने वह पैन बिस्तर के नीचे छिपा दिया ताकि मां की नजर उस पर न पड़े। वह बोली बेटा दाल में तो कुछ काला जरुर है। सच्च सच्च बताओ। सिपाही बनने के लिए हर बात साफ साफ स्पष्ट होनी चाहिए। वह डर रहा था। मां को क्या बताए। वह। आईस्ता से बोला कुछ भी तो नहीं मुझे नींद ही नहीं आ रही थी। उसने जानबूझ कर अपनी रजाई नीचे  तक फैला दी थी जिससे उसकी मां को जरा भी शक न हो। वह बोली रजाई को तो ठीक कर लेते। जाते जाते उसकी मां नें रजाई ऊपर की ओर की उसकी मां की नजर ब्रश पर पड़ी। इस पेंन्ट से तुम क्या कर रहे थे? और इस पैन में यह पेन्ट क्यों किया? तुमने यह पेन्ट का डिब्बा अपनें पापा से लिया। वह बोला नहीं मां अपनें आप उठा कर लाया। उसकी मां बोली बेटा यह तो चोरी हुई। मैनें तुम्हे बताया था कि किसी की भी कोई वस्तु नहीं उठाते। अपनें पापा से पुछा कर ले लेते तो वे भी कभी तुम्हे मना नहीं करते। लाखन रो कर बोला मां उसने आज बहुत ही गलत काम किया है। उसने सारी बात अपनी मां को बता दी। उसकी मां बोली कल तुम उस बच्चे का पैन वापिस कर के आओगे तो मैं समझूंगा कि तुम एक दिन बहुत बड़े सिपाही बनोगे। अभी कुछ भी नहीं बिगड़ा है। तुम सुधर सकते हो।अध्यापक उस बच्चे की बात से प्रभावित हुए। उन्होंने उसे माफ भी कर दिया और उसकी प्रशंसा भी की और कहा तुम अवश्य ही एक दिन बहुत बड़े सिपाही बनोगे। इन्सान तो गलतियों का पुतला। है। जो गिर कर संभल जाए उसकी हमेंशा जीत होती है। राहुल नें भी उसे माफ कर दिया। अध्यापकों नें उसे पैन का डिब्बा ईनाम में दिया। उस दिन के बाद उसने कभी भी चोरी नहीं की।

होनी को कुछ और ही मंजूर था  एक बार उनके गांव में भयंकर बाढ़ आई और जिससे  आसपास के क्षेत्रों में बहुत ही भयानक तबाही हुई।  इतनी भयंकर बाढ़ आई थी  किसी का भी कुछ नहीं बचा। घोषणा कर दी गई कि सभी लोग  यहां से  दूसरे क्षेत्र में चले जाएं  जब तक हालात नहीं सुधरते। जैसे तैसे करके उनका परिवार तो बच गया  मगर अब उनके पास खाने के लिए अनाज का एक भी दाना नहीं  बचा था । उनका सब कुछ बाढ़ में नष्ट हो गया था।

लाखन के पिता के पास ले देकर एक  रेडी ही बची थी।   उन्होंने    फिर भी हौसला नहीं हारा एक दूसरे को तसल्ली दी। सारे परिवार को समझाया।  होनी को कौन टाल सकता है? हमें इस मुसीबत की घड़ी में एक दूसरे का साथ देना चाहिए। शुक्र है कि हमारा परिवार बच गया इससे ज्यादा हमें और कुछ नहीं चाहिए। हमारी  बुढापे की लाठी तो हमारे साथ है। खुशी मनाओ कि हमारे बेटे को कुछ नहीं हुआ  नहीं तो अनर्थ हो जाता। लाखन के पिता कहते कि मैं रेढी चला कर कुछ कमा कर ले ले आया करूंगा पहले हालात तो ठीक हो जाएं। इस बार  बाढ ने चारों ओर तबाही ही तबाही ला दी थी। बहुत से लोग बाढ़ की चपेट में आ गए थे। किसी का कुछ भी नहीं बचा था। जिस किसी के पास जो कुछ बचा था वह बहुत ही कम था। कुछ दिनों के लिए  उन्हें किसी पास के क्षेत्र में उन्हें भेज दिया गया था कर्ण का परिवार भी बच गया था लेकिन उसके मां-बाप बहुत ही दुःखी थे अब क्या करें?। वह रो-रोकर एक दूसरे को अपना हालात बयान कर रहे थे। लाखन नें अपने दोस्त कर्ण को गले से लगा लिया और कहा कि दोस्त हम तो जिंदा है हम अपने मां-बाप को संभालेंगे हम एक दूसरे की मदद अवश्य करेंगे हम अपने मां-बाप को दुख नहीं देंगे। थोड़े दिनों बाद स्थिति कुछ सुधरी।

 

लोंगो के  रहने के लिए तंबू गाड़ दिए गए थे। लोग उसमें रहने के लिए चले गए थे। लखन के माता पिता तो रेडी चला कर अपना पेट भर रहे थे मगर कर्ण के माता पिता बहुत ही दुखी नजर आ रहे थे। उन्होंने तो कभी भी मेहनत-मजदूरी नहीं की थी। लाखन अपने पिता से बोला कि पिताजी हम हमें इनकी मदद भी करनी चाहिए। उनका हौंसला बढ़ाना चाहिए। जो कुछ लाते उसमें से वह कर्ण के माता पिता को भी दे देते। कर्ण के माता पिता को भी महसूस हुआ कि हमने इस बच्चे के साथ बहुत ही अन्याय किया। हमने इस को अपने घर में नहीं आने दिया। हम अपने बड़ा होने पर मान किया करते थे। इस बच्चे ने सिखा दिया कि इस दुनिया में कोई भी छोटा और बड़ा नहीं है दुनिया में सभी एक जैसे हैं। वह धीरे-धीरे वह भी मेहनत करने लग गए थे।

 

एक दिन कर्ण और लाखन ने सोचा कि अब हम भी कमा कर लाया करेंगे जिससे हमारे घर का खर्चा भी निकल सकेगा। बाढ़ आ जाने के कारण चारों ओर चोरों का आतंक छाया हुआ है। चोर चुपके से आकर लोगों का  सामान तंबुओं में से निकाल कर ले जाते थे। जिससे आसपास के लोग बड़े दुःखी थे। कुछेक लोग तो ताकतवर थे परंतु कुछ एक लोग ऐसे थे जो कि उन चोरों का मुकाबला नहीं कर सकते थे। वह काफी लाचार थे जितना कमाते थे उतना ही चोर उनका सामान लूटकर ले जाते थे। फरियाद करें तो किसके पास।

एक दिन लाखन ने कर्ण को कहा कि हमें ही कुछ करना होगा वर्ना गांव के लोग यूं ही लड़ लड़ कर मर जाएंगे। उन दोनों ने एक योजना बनाई अबकी बार जब लुटेरे चोरी करने के लिए  जब तंम्बुओं में घुसेंगे तो  हम उन पर कड़ी नजर रखेंगे। उनको उन्हीं की ही भाषा में जवाब देना होगा। एक दिन जब लुटेरे उस तंबू में चोरी करने के लिए आए लाखन ने उन्हें आते हुए देख लिया। लाखन नें  सिपाही की वेशभूषा पहनी हुई थी। उसने लुटेरों को कहा कि तुम यहां पर क्या लेने आए हो? मैं एक सिपाही हूं अगर मैं तुम्हारी शिकायत  पुलिस वालों से कर दूं तो तुम तो पकड़े जाओगे। आज मैंने तुम्हें रंगे हाथों पकड़ लिया है। अभी जाकर मैं सब कुछ सच-सच पुलिस इंस्पेक्टर को बताता हूं। पुलिस इंस्पेक्टर मेरा दोस्त है। लुटेरे बोले तुम्हारे जैसे झूठ बोलने वाले हमने  बहुत देखें हैं। तुम झूठ भी बड़ी होशियारी से बोल लेते हो। पहले  तुम हमें अपने सिपाही पुलिस इंस्पेक्टर से मिलवाओ   तब हम जानेंगे कि तुम ठीक कह रहे हो या गलत। वह बोला तो ठीक है। कल तुम्हें मैं दूर से उन से मिलवा दूंगा और तुम्हें सजा भी दिलवा दूंगा।

लुटेरे डर गए बोले हम चोरी नहीं करेंगे। परंतु तुम हमें कल पहले पुलिस इंस्पेक्टर से मिलवाना। हम दूर से देखेंगे। यह कहकर लुटेरे वापस चले गए।

दूसरे दिन लाखन ने अपने दोस्त कर्ण को कहा कि तुम पुलिस इंस्पेक्टर बन कर आ जाना औरतुम्हें मैं इशारा करूंगा तुम समझ जाना कि मेरे आस-पास लुटेरे हैं। तुम उनके पास आकर कहना तुम कहां से आए हो? मैंने पहले तुम्हें यहां कभी नहीं देखा। मैं उन्हें बचाने की कोशिश करूंगा तब तुम मेरे कहने पर उन्हें छोड़ देना। हम बाद में उन गुंडों को अवश्य ही पकड़ लेंगे और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा देंगे। दूसरे दिन लाखन उन लुटेरों के पास आकर बोला यह पुलिस इंस्पेक्टर तो बहुत ही सख्त है।  तुम  अगर उनके पल्ले पड़ गए  वह तुम्हें छोड़ेगा नहीं। तुमने क्या-क्या मार चोरी किया है? तुम उसे मेरे घर में छुपा दो। हो सकता है वह तुम्हारे घर में तलाशी ले। वह लुटेरे बोले यह कभी नहीं हो सकता। तुम झूठ कहते हो। लाखन बोला आज यहां पर  पुलिस इंस्पेक्टर आने ही वाला है। आज खुद ही देखते हैं। पुलिस इंस्पेक्टर जैसे ही आया लाखन ने उसे इशारा कर दिया था। लाखन उन उन गुंडों के साथ ही था।  लाखन नें पुलिस इन्सपैक्टर से हाथ मिलाया।

लाखन  ने उन लुटेरों को पुलिस इंस्पेक्टर के साथ  मिलाया।पुलिस इन्स्पैेक्टर बोला यह व्यक्ति कहां से आए हैं? यह तो नए लगते हैं। तुम कहां रहते हो? जल्दी से हमें बताओ यहां पर कुछ लुटेरों का बोलबाला हो गया है इसलिए हमें चारों तरफ तलाशी लेनी पड़ेगी। तुम जल्दी से अपने घर का पता बताओ। लुटेरे डर के मारे कांपनें लगे। वह बोले हमारा घर यहां से काफी दूर है। कल हम तुम्हें अपने घर ले जाएंगे। यह हमारे घर का पता है। उन्होंने एक कॉपी पर  अपने घर का पता नोट कर दिया।

पुलिस इन्सपैक्टर बोला आज तो तुम्हें  अपनें दोस्त के कहनें पर छोड़ दिया। लाखन बोला यह लुटेरे नहीं है। पुलिस इन्सपैक्टर  बोला  तुम्हारे कहने पर मैं इन्हें छोड़ रहा हूं। मगर कल मैं इनके घर अवश्य आऊंगा।

लाखन को तो सब पहले से ही मालूम था कि लुटेरों ने चोरी किया हुआ माल अपने घर में रखा हुआ था। लाखन इन लुटेरों से बोला मुझे पता है तुम ने इन लोगों का चोरी किया हुआ माल अपने पास रखा है। तुम उस सामान को मेरे घर पर रख दो। तुम्हारा माल भी सुरक्षित रहेगा और तुम भी पकड़े नहीं जाओगे। लुटेरों को उसकी बात पसंद आ गई। लुटेरों ने सारा का सारा लूटा हुआ माल लाखन के घर पर रख दिया।

वादे के मुताबिक पुलिस इंस्पेक्टर दूसरे दिन लुटेरों से मिलने गया। वहां पर कुछ भी उसे हासिल नहीं हुआ। लाखन ने उसे पहले ही बता दिया था कि  उसनें चोरी किया हुआ माल अपने घर में रखा है।

पुलिस इंस्पेक्टर लाखन  से बोला कहीं तुम भी तो इसके साथ   नहीं मिले हुए हो। तुम्हारे घर पर भी तलाशी लेनी पड़ेगी। चलो, चल कर देखते हैं। तुम मेरे दोस्त हो तो क्या हुआ? इंस्पेक्टर का फर्ज होता है कि चोरी करने वाले का पर्दाफाश करें।  पुलिस इंस्पेक्टर कर्ण लाखन के घर पर आते हैं। वहां पर छानबीन करते हैं। लुटेरे भी उसके साथ उसके घर पर आते हैं।

अचानक कर्ण की नजर उन गठरियों पर पड़ती है। पुलिस इंस्पेक्टर कहते हैं कि इन गठरियों में क्या है? खोलो खोल कर बताओ। उन गठरीओं में सभी लोगों का लूटा हुआ माल था पुलिस इंस्पेक्टर लाखन से बोले अब तुम्हें मेरे हाथ से कोई नहीं बचा सकता। तुमने चोरी की है।  पुलिस इन्सपैक्टर  लाखन के घर पर छापा डाल कर चोरी किया माल बरामद करतें हैं। । लाखन कहता है कि मैंने चोरी नहीं की। यह मेरे साथ लुटेरे हैं। यह माल इन्हीं का लूटा हुआ माल है। उन्होंने चोरी करके मेरे घर पर यह माल रख दिया। लुटेरे कहने लगे यह झूठ कहता है। यह हमारा माल नहीं है। यह तो इसी ने चोरी किया होगा। लुटेरे वहां से भाग गए। लुटेरे जैसे ही भाग रहे थे कर्ण और लखन ने दोनों ने असली पुलिस इंस्पेक्टर को फोन कर दिया था। हमारे क्षेत्र में कुछ लुटेरों ने आतंक मचाया हुआ था। हमने उन्हें पकड़ लिया है। पुलिस इंस्पेक्टर और सिपाही बनकर उन लुटेरों का सफाया किया और उन्हें पकड़ लिया है। आप जल्दी से आकर उन लुटेरों को पकड़ लीजिए। वह अभी ज्यादा दूर नहीं गए हैं। पुलिस इंस्पेक्टर ने उन्हें  बता दिया था कि यहां पर इन चोरों की गाड़ी खड़ी है। पुलिस स्पेक्टर ने समय पर पहुंचकर उन लुटेरों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। कर्ण और लाखन के इस प्रकार सेवाभाव को देखकर कहने लगे तुम अवश्य ही सिपाही और पुलिस इंस्पेक्टर बनने लायक हो। आज से तुम्हारी पढ़ाई का और सारा खर्चा हम करेंगे। तुम दोनों ही अपने मकसद में जरूर कामयाब होंगे। लोंगों को उनका चोरी किया गया माल वापस मिल गया था सब लोग उनकी प्रशंसा करना नही थकते थे।

एक दिन कर्ण बहुत ही बड़ा पुलिस इंस्पेक्टर बना और लाखन भी एक बहुत बड़ा सिपाही। उन दोनों ने अपने मां बाप का नाम रोशन किया। हालात ठीक हो चुके थे। सब के चेहरों पर खुशी की लहर थी।

एक दिन कर्ण बहुत ही बड़ा पुलिस इंस्पेक्टर बना और लाखन भी एक बहुत बड़ा सिपाही। उन दोनों ने अपने मां बाप का नाम रोशन किया। हालात ठीक हो चुके थे। सब के चेहरों पर खुशी की लहर थी।  

मैं कहानी का गुल्लक की लेखिका  मीना शर्मा ने अपना ब्लौग बना लिया है।  https//कहानी का गुल्लक. इन हिन्दी short stories and poems. अब मेरे ब्लौग में जा कर कहानियों का भरपूर आन्नद लिजीए। धन्यवाद।

दो दूनी चार

बहुत समय पहले की बात है कि नूरपुर के एक छोटे से कस्बे में एक ठग रहता था। वह हर घर में ठगी करके अपना तथा अपने परिवार वालों का पेट भरता था। वह एक 2 साल से अधिक किसी भी जगह पर नहीं रहता था। वह ठगी करके अपनी आजीविका चलाता था। जब उसे लगता था कि यहां रहना खतरे से खाली नहीं है तब वह बहुत सारा धन लोगों से लेकर कर दूसरी जगह चले जाता था। वह गांव वालों को कहता था कि तुम बैंक में अपना रुपए मत डालो। मैं तुम्हें इन रुपयों को दुगना कर दूंगा। अगर किसी ने ₹500 दिए तो वह उस व्यक्ति को 3 महीनों में हजार रुपये देता था। इस तरह उसके ऐसा कर  के जिंदगी के दिन बड़े मजे से कट रहे थे,। वह जगह जगह पर जाकर ठगी करता। एक दिन उसको अपनी तरह का एक ठग मिल गया वह बोला मैं तुमसे एक शर्त लगाता हूं तुम धामपूर नामक कस्बे में जाओ। अगर तुम वहां के लोगों को बेवकूफ बना दोगे  तो मैं समझूंगा तुम सचमुच में ही शातिर खिलाड़ी  हो।

 

जगदीप दूसरे कस्बे में चला गया वहां पर  भी उसनें लोगों को कहा कि मैं तुम्हारे रुपयों को डबल कर दूंगा। पहले तो लोग उसकी बातों में नहीं आए। लोगों ने सोचा सचमुच में ही देखते हैं वह लोंगों को रुपये डबल करके देता है या यूंही लोंगों का बेवकूफी बना रहा है। एक आदमी को उस ठग के घर पर भेजा। वह ₹500 लेकर आया मैंने सुना है कि आप रुपयों को डबल करते हैं। मैं आपके पास  500रुपये दे कर जा रहा हूं। 3 महीने बाद मैं आप से  इन के डबल रुपये ले लूंगा। लोगों ने शिब्बू को कहा कि एक महीना हो चुका है। तुम सेठ जी के पास जाकर ₹500 के ₹1000 ले आओ।

 

वह व्यापारी  के पास जाकर बोला मुझे मेरे रूपए दे दो। मैंने पिछले महीने रुपये डबल करने के लिए दिए थे। व्यापारी नें कहा ठीक है ले लो। उसने गल्ले में से निकालकर शिब्बू को हजार रुपये दे दिए। वह खुश होकर जब घर को वापिस आया बोला बाबूजी भगवान आपका भला करें। वह खुशी-खुशी घर आ गया। उसको कस्बे वाले लोगों ने पूछा तुम्हे सेठ नें रुपये डबल कर के दे दिए। वह बोला हां। लोग खुश हो गए।वे आपस में बोले सच में यह तो बहुत खुशी की बात है हम अपने बैंक में रुपए क्यों रखेंगे? वहां तो ना जाने क्या क्या कार्यवाही करनी पड़ती है। अपने रुपए इन सेठ जी के पास ही जमा करवाया करेंगे। लोगों को नकली सेठ बनकर  उस गांव वाले लोगों का  सेठ नें विश्वास जीत लिया। लोग उसके पास  रुपए जमा करवाने आने लगे। इस तरह 6 महीने व्यतीत हो गए।

 

एक दिन एक आदमी उसकी दुकान पर गया बोला सेठजी मैंने आपके पास हजार रुप्ए दुगना करने के लिए दिए थे। मुझे पैसों की सख्त जरूरत है। मुझे दे दो। सेठ बोला हजार रुपये मैं तुम्हें अभी नहीं दे सकता। कल आना। दूसरे दिन जब वह अपने रुपए मांगने गया तो वह सेठ बोला देख भाई इस बार मेरा भी व्यापार मंदा चल रहा है। अगले हफ्ते लेकर जाना। वह उसको हर रोज टालता  रहा। लोग घबराने लगे। उन सब ने ना जाने इस सेठ के पास अपने कितने ही रुपए इकट्ठे कर दिए थे। कुछ लोग तो उसके पास लालच करके इसलिए रुपए जमा करवाने गए क्योंकि रु 500, 000 के हमें रु100,000 मिल जाएंगे। यह तो सचमुच में ही हमारे रुपए डबल करके देगा। वह लालच में आकर  उसके पास रुपए डबल करने के लिए जाने लगे। कुछ दिन तो उसने उनके रुपए डबल करके दिए। जब उसने उनका विश्वास जीत लिया तो वह उन्हें टालने लगा।

 

गांव के सभी लोगों ने एक जगह मिलने का वादा कर लिया। उनको पता चल गया था कि वह लोगों को मूर्ख बना रहा था। वह अपना व्यापार उनके रुपयों से आगे बढ़ा हरा था। लोगों को उसकी करतूत पर बड़ा गुस्सा आया।

 

एक बहुत ही होशियार आदमी ने उन लोगों को राय दी कि तुम इस तरह से करना। उस ने समझा-बुझाकर एक आदमी को सेठ के पास भेज दिया। वह आदमी जब सेठ जी से रुपए मांगने आया तो दुकान पर जाकर बोला सेठजी मेरे घर पर जरुर आना। मेरे बेटे का जन्मदिन है। आपको मेरा निमंत्रण है।सेठ सोचने लगा कि ठीक है। इसके घर पर जरूर जाना चाहिए। बेचारा घर पर आ कर अपनें बेटे के जन्म दिन का निमंन्त्रण  देने स्वयं चल कर मेरे घर आया है। वह उसके घर पर चला गया। जैसे ही वह सेठ उस आदमी के घर बताये पते पर पहुंचा दरवाजे पर दस्तक दी। उसको अंदर से रोने की आवाज आई। उसने अंदर जाकर देखा वह आदमी सेठ से बोला। सेठजी मैंने अपने बेटे के जन्मदिन के लिए रुपए इस मटके में रखे थे। ना जाने कब जैसे चोर उठा कर ले गये। हम अपने बेटे का जन्मदिन कैसे मनाएं। । मेरी पत्नी  तो  रो रो कर बेहोश हो गई है। वह मुझसे कह रही है कि साल में एक बार तो बेटे का जन्मदिन मनाते हैं वह भी हम मना नहीं सकते। कुछ रुपये आपके पास जमा किए थे। कुछ रुपये चोर चुरा कर ले गया। अब हम क्या करें? सेठजी उन को रोता हुआ देखकर बोले रो मत तुम अपने बेटे का जन्मदिन जरूर मनाओ। उसने अपने जेब से ₹2000 लेकर उन्हें  दे दिए। पति ने अपनी पत्नी को चुपचाप इशारा करते हुए कहा मुस्कुराते हुए चुपके से कहा। देखा भाग्यवान हमने अपने रुपए इस सेठ जी से कबूल कर लिए। व्यापारी उस आदमी से बोला। मैं चलता हूं। तुम्हारे घर में फिर कभी खाना खा लूंगा। आज मुझे कोई जरूरी काम याद आ गया है। जैसे ही व्यापारी गया पति  अपनें पत्नी से बोला। उसने सोचा होगा यही हमें मुर्ख बना सकता है हम गांव वाले इसकी चिकनी-चुपड़ी बातों में आने वाले नहीं है। आज मैंने तो अपने  रुपए  इस से वापस प्राप्त कर लिए।इस तरह लोग किसी ना किसी तरह से रुपए वापस लेते रहे। एक दिन एक आदमी जिसने सेठ जी को ₹200000 दिए थे वह आकर बोला सेठजी मैं आपको अपनी बेटी की शादी का कार्ड देने आया हूं कृपया करके मेरी बेटी की शादी में जरूर आना। व्यापारी सोचनें लगा कहीं पर यह भी तो मुझे बेवकूफ तो नहीं बना रहा है। बाद में उसने सोचा लड़की की शादी में भला यह क्यों झूठ बोलेगा? वह उसकी बेटी की शादी में पहुंच गया। जैसे ही शादी समाप्त होने वाली थी लड़की और लड़के फेरों के लिए जा रहे थे तो लड़के वालों ने लड़की वालों से मांग रखी कि अगर आप हमें ₹200000 नहीं देंगे तो हम तब तक बारात लेकर नहीं जाएंगे। हमने अपने बेटे की पढ़ाई में ₹200000 खर्च किए हैं। हम तुम्हारी बेटी की साथ शादी तभी करेंगे अगर आप हमें ₹200000 देंगे। यह सुन कर जीतराम और उसकी पत्नी फूट-फूट कर रोने लगे। हमारे पास ₹200000 कहां है?  भी हम बड़ी मुश्किल से  यह रुपये उधार लेकर शादी कर रहे हैं। मैंने उस व्यापारी के पास ₹200000 इकट्ठे करने के लिए दिए हैं।  किसी ने भी  जब उसे रुपए नहीं दिए तो उसने अपनी पगड़ी लड़के वालों के पैर के पास रख दी। यह सब वह व्यापारी देख नहीं सका। उसने कहा रुको। उसने अपने घर  नौकर को फोन किया ₹200, 000 लेकर जल्दी  से इस घर  के पते पर आ जाना। सेठ का नौकर ₹200, 000 लेकर आ गया। उसने जीतराम को कहा तुम रो मत। यह लो ₹200, 000। लड़की के पिता ने ₹200, 000 लड़के के पिता को दे दिए। लड़की वाले बहुत ही खुश हुए। लड़की का पिता हंस कर चुपचाप चुपके से अपनी पत्नी से बोला देखा मैं भी मुर्ख नहीं बना। मैंने अपने ₹200, 000 सेठ से प्राप्त कर लिए। मैंने उसे झूठ-मूठ में ही कहा कि मेरी बेटी की शादी है। ना मेरी बेटी की शादी थी

 

यह सारे आदमी तो मैंने रुपया देकर खरीदे थे। कुछ मेरे रिश्तेदार थे। जिन्होंने मेरा साथ दिया था। तब मैं अपना ₹200, 000 इस से लेने में कामयाब हो गया। गांव वाले लोग खुश हो गये। हम सब को भी उस व्यापारी से जल्दी से रुप्ए वापिस लेंने की योजना बनानी होगी जिससे  सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे।

 

जब व्यापारी अपने घर पहुंचा तो उसका दोस्त पहले ही वहां पहुंच चुका था। वह बोला मेरे यार तुम घर आ गए। मैं तुमसे शर्त जीत गया हूं। मुझे मेरी शर्त के ₹10000 दे दो। वह बोला मैं समझा नहीं। उसने कहा कि  एक आदमी को जब मैंने पता करने भेजा जहां पर शादी थी तो उन्होंने हंसकर कहा कि हमने तो उस सेठ को भी मूर्ख बनाया।  उन्होंने तो हमें बुद्धू बनाया। हमने उन्हें भी उन्हीं की भाषा में करारा जवाब दिया। हमारे गांव में इतनी हेराफेरी नहीं चलेगी।

 

व्यापारी के घर के पास ही एक बड़ा क्लीनिक था। उस क्लीनिक में वह व्यापारी अपना चेकअप वगैरह करवाता था। उस क्लीनिक में काम करनें वाले डॉक्टर के साथ उसकी खूब पटती थी। वह उसका दोस्त था। जब कभी भी उसके पत्नी बीमार होती थी तो वह उस क्लीनिक में उसे लेकर जाता था। एक दिन सारे गांव के लोग मिलकर  उस क्लीनिक में डॉक्टर के पास जाकर बोले। डॉक्टर साहब डॉक्टर साहब आपको तो यहां पर क्लीनिक खोले इतने साल हो  गये। यहां पर आकर आप यही के निवासी हो गए हैं। हम सब आपके पास फरियाद लेकर आए हैं अगर आप आज हमारा साथ देंगे तो हम समझेंगे कि  आप कहीं ना कहीं हमारे हितैशी हो। हम आपको बता दें कि यह व्यापारी इसको आए अभी 6 महीने ही हुए हैं। यह लोगों को रुपए डबल करने का वादा करता है। लोग इसके पास रुपए डबल करने के लिए जाते हैं। कुछ दिन तक तो यह लोगों को डबल करके रुपए दे देता है। इसने लोगों का विश्वास जीत लिया है। लोग इस पर आंख मूंदकर विश्वास करते हैं।  बेवकूफ  लोग नहीं जानते हैं कि यह कितना बड़ा फ्रॉड है? वह लोगों को बेवकूफ बनाकर उनके साथ धोखाधड़ी कर रहा है। डॉक्टर साहब अगर आप हमारा साथ दोगे तो हम सब समझेंगे कि आप जैसा देवता हमारे कस्बे में और कोई नहीं है। आपको हम इस नेक काम के लिए  ₹20, 000 देंगे। आप हमारा साथ देना। डॉक्टर ने कहा कि मुझे क्या करना होगा? वह बोले इस व्यापारी के बच्चे के साथ आपका बेटा पढता है।

 

आज जब आपकी पत्नी अपने बेटे को लेने जाएगी तो आप उसके बच्चे को कहना कि आपके मम्मी पापा  दो दिन तक कहीं बाहर गए हैं। उन्होंने कहा है कि तुम आंटी के घर पर ही रहना। हम दो-तीन दिन तक तुम्हें वापस आकर ले जाएंगे। जैसे ही माधवी अपने बच्चे को लेने गई उसने राजू को कहा आपके मम्मी पापा  दो दिन के लिए कहीं बाहर गए हैं। वह कह गए हैं कि आप यही राजू के साथ खेलना। वह रवि का दोस्त था। रवि उसके साथ खुशी-खुशी उनके घर पर रह गया। शाम के समय जब रवि घर नहीं पहुंचा तो माधवी घबरा गई। मेरा बेटा ना जाने कहां चला गया। वह अपने पति से फोन करके बोली हमारा बेटा घर वापस नहीं आया। कृपा करके हमारे बेटे को जल्दी वापस लाओ।।

शाम के समय व्यापारी को एक आदमी का फोन आया आपका बेटा हमारे पास है। आप अपने बेटे की ख़ैरियत चाहते हो तो  दो करोड  ले  कर आओ। दो करोड़ का नाम सुनकर उसके पांव तले  जमीन खिसक गई। रोते-रोते अपनी पत्नी से  बोला।  हम ढेर सारे  रुपये हम कहां से लाएंगे? उसने देखा उसकी दुकान के पास कुछ लोग अपने  रुपये लेने आए थे।

 

उसको यूं रोता देख कर बोले बाबू जी हमें बताओ क्या हुआ है? वह बोला मेरे बेटे का किसी ने  अपहरण कर लिया है। वे लोग मुझ से दो करोड़  रुपये की मांग  कर रहे हैं। मैं दो करोड़  रुपये  कहां से लाऊंगा। वह अपनी पत्नी को बोला एक-दो दिन तक इंतजार करते हैं। अगर हमारे बेटे को वह नहीं लौटाता  है तो रुपयों का कहीं  न कंही से इंतजाम तो करना ही पड़ेगा।  दो दिन व्यतीत हो गए। उसके बेटे का कोई पता नहीं चला। उसने पुलिस में भी फोन कर दिया। पुलिस वाले बोले हम आपके बेटे को ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं। माधवी अपने पति से बोली। आप तो लोगों के रुपए डबल करने का झूठा नाटक करते थे। आज आपको पता लग गया रुपए डबल करने का नतीजा

 

लोग व्यापारी के पास आकर बोले।  सेठसाहब आपके पास तो दो करोड़  होंगे ही। आपने तो ना जाने लोगों के कितने रुपए डबल करके रखें होंगें। अगर आज हमारे बच्चे का इस तरह   अपहरणकर्ता होता तो हमारे पास तो अपने बच्चों को बचाने के लिए रुपये  नहीं होते। हम तो खून के घूंट  पीकर रह जाते।

 

सारे  के सारे गांव वाले लोग मुझे माफ कर दो। मैं तुम सब से आज तक झूठ बोलता रहा। मैं तुम्हारे रुपए तुम से लेकर अपना व्यापार आगे बढ़ाना चाहता था। मैंने तुमसे छल कपट करना चाहा। जिसका मुझे यह परिणाम मिला है। तुम सब लोग मुझे माफ कर दो। मेरे पास भी अपने बेटे को बचाने के लिए  दो करोड़ रुपए नहीं है। वह जोर जोर से रोने लगा।

 

व्यापारी की पत्नी बोली आज तो यह गांव के लोग भी आपकी मदद नहीं करेंगे। व्यापारी की सारी बातें गांव का एक आदमी रिकॉर्ड कर रहा था। सच सामने आकर बोला व्यापारी साहब आपके बेटे का कोई अपहरण नहीं हुआ है। यह तो आप को सबक सिखाने के लिए हमारी सोची समझी चाल थी।

 

आपका बेटा सही सलामत घर पहुंच जाएगा वह आपके दोस्त डॉक्टर के घर पर खूब मजे में है। उसे कोई चोर  चुराकर नहीं ले गया। आप जल्दी से जल्दी हमारे रुपये वापस कर दो अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो हम आपकी सारी रिकॉर्डिंग पुलिसवालों को सुना देंगे। व्यापारी अपनी करनी पर पछता कर बोला मैं कभी भी किसी के रुपए डबल करने की कभी सोचूंगा भी नहीं। मुझे माफ कर दो। उस दिन के पश्चात उसने रुपए डबल करना छोड़ दिया। वह उसी गांव में रहने लगा और उसने धीरे-धीरे सभी गांव वालों के रुपए वापस कर दिए। उसने बेईमानी करके रुपए कमाना छोड़ दिया और एक अच्छा इंसान बन गया। उसनें अपने दूसरे ठग दोस्त को कहा ये लो अपने दस हजार रुपये। तुम भी कसम खाओ कि आज के बाद तुम भी ठगी करके रुपया नहीं कमाओगे।

लालची बहनें

तीन चचेरीं  बहने थी। दो बहने तो मध्यम परिवार से संबंध रखती थी। उनमें से एक थोड़ी अमीर थी। तीनों ने अपने मनपसंद लड़के के साथ शादी कर ली। पहली बहन का पति लक्कड़ हारा था। वह लकड़ियां बेच कर अपना जीवन निर्वाह कर रहा था। तीनो बहने साथ-साथ घर में ही रहती थी। उनके पति जो कुछ कर कमा कर लाते थे। वह मिल बांट कर खाती थी। वह एक दूसरे को सारी बात बता देती थी कि आज मेरे पति यह लाए हैं, जब तक वह एक दूसरे से सारी बातें एक दूसरे से खुलकर नहीं कह देती थी उन्हें तब तक खाना हजम नहीं होता था।

पहली बहन का पति एक लकड़हारा था। दूसरी का धोबी और तीसरी का व्यापारी। उन्होंने प्रेम विवाह किया था। इसलिए इनके मां बाप ने उनकी शादी उनके मनपसंद लड़को से  शादी कर दी थी।

 

पहली बहन का  पति एक लकड़हारा था। वह लकड़ियां बेच बेच कर अपना जीवन व्यतीत करता थाह एक दिन जब वह लकड़ियां काट रहा था तब उसकी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई। वह जोर जोर से रोने लगा और सोचनें लगा हमारा घर तो जल चुका है।  मेरे पास  अब एक कुल्हाड़ी के सिवा कुछ नहीं बचा है। यह कुल्हाड़ी भी नदी में गिर गई। वह अब कैसे अपने परिवार और अपनी पत्नी को क्या खिलाएगा? वह सोच कर वह जोर जोर से रोने लगा। उसके रोने की आवाज सुनकर नदी में नदी के देवता वहां पर आ गए और उन्होंने लकड़हारे को कहा कि तुम क्यों रो रहे हो? लकड़हारे ने कहा कि मेरी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई है। मेरे पास यही एक कुल्हाड़ी  बची थी लेकिन वह भी नई में गिर गई। जल देवता को उसकी बातों में सच्चाई नजर आई।  वह पानी में गया और पानी में एक सोने की कुल्हाड़ी ले कर आया। लकड़हारे ने कहा मेरी कुल्हाड़ी यह नहीं है।  यह कुल्हाड़ी मेरी नहीँ है। इसके पश्चात जल देवता चांदी की कुल्हाड़ी ले कर आए वह बोला यह  कुल्हाड़ी  भी मेरी नहीं है।  जल देवता ने तीनों कुल्हाड़ियां  उस की इमानदारी से खुश हो कर उसे दे दी। लकड़हारा जब घर आया तो उसने अपनी पत्नी से यह बात कहीं। उसकी पत्नी ने यह बात अपनी दोनों बहनों से कह दी।

 

दूसरी बहन  नें सोचा क्यों न जंगल में नदी के किनारे जा कर अपनी किस्मत आजमाती हूं। दूसरे दिन  नदी के पास  वह धोबिन जंगल में नदी के पास कपड़े धोने चले गई। वह कपड़े जोर जोर  से पटक पटक कर धोने लगी।  जोर जोर से कपडों को पटकने का नाटक करनें लगी। पटकने  के कारण उसने अपनी नकली अंगूठी नदी में गिरा दी और जोर से रोने का नाटक करने लगी। उसको जोर जोर से रोते देख कर जल देवता पानी से बाहर आ कर बोले तुम क्यों रो रही हो? वह रो रो कर जल देवता को कहनें लगी  कि मेरी सोने की अंगूठी नदी में गिर गई है। जल देवता पानी के  अन्दर गए और सोने की अंगूठी लेकर आए। वह धोबिन सोनें की अंगूठी देख कर बोली,  मैं बहुत ही खुश हूं। वह जल देवता के पैरों पर गिर गई और कहने लगी यही मेरी अंगूठी थी। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

 

जब उसने घर आकर अपनी तीसरी बहन को यह बात बताई तो उसके मन में भी लालच आ गया। वह जल्दी  ही सुबह सुबह बिना किसी को कुछ बताए नदी पर  पंहूंच गई।  वह भी जोर जोर से रोनें का नाटक करनें लगी।जल देवता नदी से बाहर आ कर बोले  तुम यंहा बैठ कर आंसू क्यों बहा रही हो?  वह और भी जोर जोर से रोने लगी  वह कहने लगी कि मेरे पति एक व्यापारी है। वह जब बहुत सारी धन-दौलत लेकर आ रहे थे तो  डाकूओं ने उनका सब कुछ छीन  लिया। उनके पास  एक आभूषण का डिब्बा  बचा था जो   वह मुझे  ले कर   आ रहे थे। वह डिब्बा भी पानी में गिर गया।  मैं सोचती हूं कि  अभी इस नदी में गिर कर अपनी जान दे दूं।

तीसरी बहन बहन पर भी भी जल देवता को दया आ गई। उसने उसे एक डिब्बा लाकर दे दिया। यह तुम्हारा है क्या? उसमें हीरे का हार था। वही हीरे  का हार पाकर बहुत ही खुश हुई। हीरे का हार देख कर उसे लालच आ गया। वह   जल देवता को  कहनें लगी यही मेरा हार है।  जल देवता को उसने धन्यवाद दिया और जल्दी जल्दी घर पहुंचने  का यत्न करनें लगी।

घर आकर तीनो बहने बहुत खुश थी। दूसरी बहन   सोचने लगी कि इस अंगूठी को बेच कर उसे बहुत  सारुपया मिल जाएगा। इस प्रकार दोनों बहने उस अंगूठी को बेचने के लिए जौहरी   के पास पहुंची। जौहरी नें अंगूठी देख कर कहा  यह तो सोने की अंगूठी नहीं है। यह तो नकली अंगूठी है। इस पर सोनें का पौलिस किया है?   दूसरी बहन भी सिवा रोने के कुछ नहीं कर सकती थी। उसनें घर आ कर सारी बात तीसरी बहन को बताई। उसकी बहनें कहनें लगी तुम भी हार जौहरी को बेच दो।

तीसरी व्यापारी की पत्नी  भी सोचने लगी कि नहीं, वह जौहरी झूठ बोल रहा होगा। मेरे पास  भी तो  हीरे का  हार है। वह उस  हार  को किसी भी कीमत पर नहीं बेचना चाहती। वह घर आ गई। उसने डिब्बे में से  हीरे का हार निकाला जैसे  ही उसने हार को गले में डाला तो उसका गला घुटने लगा। वह जितना हार को निकालने की कोशिश करती उतना ही उसका गला घुटता जाता। वह हार को निकाल नहीं पाई। वह दर्द के कारण चिल्लानें लगी। वह सोचने लगी कि उसे भी  लालच ने अंधा कर दिया था। हे भगवान बचा ले। भगवान से प्रार्थना करने लगी कि हे भगवान! आज  किसी भी तरह से मेरी जान बच जाए। वह दौड़ कर नदी पर पहुंच गई और जोर-जोर से चिल्लाने लगी। हे जल देवता! मैं आप के पैरों पर पड़ कर आप से अपनी गल्ती के लिए क्षमा मांगती हूं।  जल्दी आओ। आ कर मुझे बचा लो। उस की करुणा भरी पुकार सुन कर जल देवता पानी से बाहर  आ कर बोले  अब क्या बात है? तुम फिर से आ गई। उसने कहा मैंने आपसे झूठ बोला था। यह हार मेरा नहीं था। मैंने लालच में आकर यह हार लेने की सोची थी।

आप मुझे बचा दो। आज से मैं  कभी भी लालच नहीं करूंगी। जल देवता बोले  मैं इस शर्त   पर तुम्हें छोड़ता हूं कि अब तुम कभी भी लालच नहीं करोगी। जल देवता ने उसे  छोड़ दिया। उस दिन के बाद उसनें लालच करना छोड़ दिया। दोनों बहनों नें ईमानदारी का रास्ता अपना लिया।

अनोखी गिनती

एक दो तीन चार।

गाय की टांगें चार

पांच छः, सात आठ।

मकडी की टांगे आठ।

 

नो दस ग्यारह बारह।

एक दर्जन में होतें हैं बारह।

तेरह चौदह, पन्द्रह सोलह।

आठ दूनी होतें हैं सोलह।

 

सतराह, अठारह, उन्नीस बीस।

हमारे हाथ पांव की ऊंगलियां बीस।

इक्कीस बाक्स, तेईस चौबीस।

हमारे राष्ट्रीय झंडे में तिलीयां होती है चौबीस।

पच्चीस छब्बीस सताईस, अठठाईस।

फरवरी में दिन होतें हैं अठठाईस।

 

उननतीस तीस, इक्कतीस।

महीनें में दिन होंतें हैं तीस इक्कतीस।